यदि अस्पताल के डॉक्टरों की माने तो उनकी हालत नाजुक होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। फिर ह्रदय रूकने की वजह से निधन हो गया।
यदि भूपिंदर दादा के कैरियर पर नज़र डालें तो उन्होंने सभी बड़े गायको और संगीत निर्देशकों जैसे आर डी वर्मन, गुलज़ार, मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर आदि के साथ काम किया। उनके कई हिट गानों और ग़ज़लों में दिल ढूंढता है, नाम गुम जाएगा, एक अकेला इस शहर में, बीती न बिताए रैना, हुज़ूर इस तरह भी इतरा के न चलिए, किसी नज़र को तेरा इनतजार आज भी हैं आदि। आज भी उनके गाने मन मोह लेते हैं।
आज 19 जुलाई को उन्हें अंतिम दर्शन के लिये रखा जाएगा और दाह संस्कार होगा।
सुप्रभात चित्रनागरी की ओर से महान गायक भूपिंदर सिंहजी को भावभीनी श्रद्धांजलि!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें