नदिया के पार के एक्टर इंद्र ठाकुर: आतंकी हमले ने ली थी जान, बीवी-बच्चे भी हुए थे खत्म; रूह कंपा देगी यह दास्तां
राजश्री प्रोडक्शंस की सदाबहार फिल्म 'नदिया के पार' (Nadiya Ke Paar) आज भी जब टीवी पर आती है, तो लोग अपनी जगह से हिल नहीं पाते। इस फिल्म के किरदारों ने दर्शकों पर एक गहरी छाप छोड़ी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में बड़े भाई 'ओमकार' का किरदार निभाने वाले अभिनेता इंद्र ठाकुर (Inder Thakur) का अंत बेहद दुखद और रूह कंपा देने वाला था?
इंद्र ठाकुर केवल एक अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक शानदार इंसान भी थे, जिनका जीवन एक कायराना आतंकी हमले की भेंट चढ़ गया।
कौन थे इंद्र ठाकुर?
इंद्र ठाकुर दिग्गज अभिनेता हीरालाल ठाकुर के बेटे थे। 'नदिया के पार' में उन्होंने सचिन पिलगांवकर के बड़े भाई की भूमिका निभाई थी। उनकी सौम्य अदाकारी और संजीदा व्यक्तित्व ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। अभिनय के अलावा, वह एक बेहतरीन फैशन डिजाइनर भी थे। लेकिन उनकी सफलता की कहानी को नियति ने एक बेहद दर्दनाक मोड़ पर खत्म कर दिया।
एयर इंडिया फ्लाइट 182: वो मनहूस सफर
तारीख थी 23 जून, 1985। एयर इंडिया का विमान 'कनिष्क' (Kanishka) मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए दिल्ली और मुंबई के लिए उड़ान भर रहा था। इसी विमान में इंद्र ठाकुर अपनी पत्नी और 7 साल के बेटे के साथ सवार थे। वे एक खुशहाल सफर पर थे, पर उन्हें नहीं पता था कि यह उनका आखिरी सफर होगा।
आतंकियों की साजिश और 329 जिंदगियां
जब विमान अटलांटिक महासागर के ऊपर 31,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी एक भीषण धमाका हुआ। यह धमाका खालिस्तानी आतंकी संगठन बब्बर खालसा द्वारा प्लांट किए गए बम के कारण हुआ था।
धमाके का असर: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि विमान के हवा में ही टुकड़े-टुकड़े हो गए।
समुद्र में दफ्न हुई दुनिया: विमान में सवार सभी 329 यात्री और क्रू मेंबर्स की मौके पर ही मौत हो गई।
परिवार का अंत: इंद्र ठाकुर, उनकी पत्नी और उनका मासूम बच्चा भी उन अभागों में शामिल थे जिनकी लाशें तक मिलना मुश्किल हो गया था। आयरलैंड के तट के पास समंदर की गहराई में 329 जिंदगियां हमेशा के लिए दफ्न हो गईं।
बॉलीवुड के लिए एक अपूरणीय क्षति
इंद्र ठाकुर की मौत की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था। 'नदिया के पार' की पूरी टीम इस सदमे से उबर नहीं पा रही थी। एक उभरता हुआ सितारा और एक पूरा परिवार नफरत और आतंकवाद की आग में जलकर राख हो गया था।
"आतंकवाद ने हमसे सिर्फ एक कलाकार नहीं छीना, बल्कि एक मासूम बचपन और एक सुहागन की खुशियां भी छीन लीं।"
आज भी ताजा हैं जख्म
कनिष्क विमान कांड को दुनिया के सबसे भीषण हवाई आतंकी हमलों में से एक माना जाता है। हालांकि इस मामले में जांच और ट्रायल सालों तक चले, लेकिन इंद्र ठाकुर के प्रशंसकों और उनके करीबियों के लिए वह घाव आज भी हरा है।
निष्कर्ष
आज भी जब 'नदिया के पार' फिल्म में हम इंद्र ठाकुर को 'बड़े भाई' के रूप में देखते हैं, तो उनकी वो मासूम मुस्कान दिल को कचोट जाती है। वह एक ऐसे सितारे थे जो आसमान में चमकने से पहले ही बुझा दिए गए।






